जयपुर SMS हॉस्पिटल में आगजनी –
जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में आगजनी की घटना सामने आई है। 6 अक्टूबर 2025 रविवार की रात को न्यूरो आईसीयू में आग के लपटें उठने लगी। संभवतः आग आईसीयू के स्टोर रूम में लगी थी जहां पर ब्लड सैंपल और मरीजो की फाइले रखी गई थी। न्यूज रिपोर्टों के अनुसार रविवार रात 11:30 बजे के लगभग धुआं उठता हुआ दिखाई दिया और पूरे रूम को अपनी चपेट में ले लिया और उस वक्त आईसीयू में लगभग 11 मरीज भर्ती थे।
Sms अस्पताल आगजनी में नुकसान-
प्रारंभिक जानकारीयो के अनुसार लगभग 6 लोगों के मौत हो चुकी हैं और 5 लोग गम्भीर रूप से घायल है। और कुछ न्यूज रिपोर्टों के अनुसार मृतक 8 भी हो सकते है। आग में झुलसे हुए मरीजों के हालात नाजुक बताया जा रहा है।
आग लगने से धुआं पूरे अस्पताल परिसर में फैल गया जिससे वेंटीलेटर पर भर्ती मरीजों को ढूंढने ओर बाहर निकालने में देरी हो गई जिससे मरीजों की दम घुटने से जान चली गई और बाकी गंभीर घायल हो गए। और परिजनों का आरोप है की अस्पताल का स्टाप घटना स्थल पर भाग गया था। इस कारण मरीजों को बाहर निकालने में देरी हुई ।
Icu में आगजनी का कारण –
प्रथम दृष्टया आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।
और साथ में जो फायर डिटेक्ट करने वाले यंत्र लगे थे जो आग को खुद से बुझा सकते है । लंबे समय से बंद रहने के कारण स्प्रिंकलर सिस्टम हार्ड हो गया ओर कम नहीं कर रहा था तो आग और अधिक फैल गई।
साथ में दमकल और आग बुझाने के अन्य तरीके भी दूर होने के कारण पहुंचने में देरी हो गई । Sms अस्पताल में पुराने सिस्टम वे पुरानी वे कमजोर लाइटिंग सिस्टम होने के कारण शॉर्ट सर्किट होना वे मेंटीनेंस के कमी होना बताया जा रहा है।
Sms अस्पताल में पहले भी टूटे पाने के कनेक्शन वे छत टपकना और बिजली की अनियमितता आदि कमीया देखी गई।
सरकार का मत ओर जिम्मेदारो पर करवाईया –
- राजस्थान सरकार ने संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए देने के घोषणा करी है।
- साथ ही SMS अस्पताल के अधीक्षक और ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी को उनके पदों से हटा दिया गया है। और साथ में रखरखाव इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है।
- SMS अस्पताल में फायर सेफ्टी का ठेका जिस कंपनी को दिया गया है उसको रद्द कर दिया गया है और कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया है।
- और अन्य अस्पतालों में भी जांच करने का आदेश दिया गया है। जो भी सुविधा दी गई है वो प्रॉपर काम कर रही है या नहीं।
- ओर 6 सदस्यों कि कमेटी बनाकर आदेश दिया है कि ये हादसा क्यों हुआ इसकी जांच हो और भविष्य में ऐसी घटना ना घटे इसके लिए क्या सावधानिया बरती जाए।
- विपक्षी दलों ने स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की है।
ऐसे हादसों की चुनौतियां –
ऐसे हादसे ने केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं बल्कि कमजोर और हत्या सिस्टम को उजागर करते है। जो अस्पताल या सरकारी सिस्टम अपनी सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर सकता वो क्या जनता की भलाई करेगा। घटया निर्माण सामग्री लंबे समय तक बिना रख रखाव यूज लेना घटिया सिस्टम की नाकामयाबियों को दर्शाता है।
ऐसे सिस्टम पर लोग कैसे यकीन करेंगे और अपना उपचार करवाएंगे जिनमें जान जाने का खतरा हो।
राजस्थान हाइकोर्ट ने भी इस मामले में चिंता व्यक्त करते हुए इस घटना को दुखद बताया है। चाह सरकारी स्कूल हो या सरकारी अस्पताल हो उनमें इस तरह का घटीया ओर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
JAIPUR HOSPITAL,